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परिषद द्वारा फैलाई जा रही मुक्तिधाम में गंदगी और पशुओं को खिलाए जा रहे ज़हर नही हो पा रहा कचरा डंपिंग की स्थाई जगह कौन सी है वजह।
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अनूपपुर।शहडोल।अमलाई। नगर परिषद बरगवां अमलाई
कचरा डम्पिंग के लिए नगर परिषद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका वार्ड क्रमांक 5 मुक्तिधाम में गंदगी फैला डंप किया जाता है गीला व सूखा कचरा, अभी तक नपं को उपलब्ध नहीं हो पायी है लैंडफिल की भूमि नगर के कुल कई वार्डों से हर दिन लगभग 10 क्विंटल कचरा निकलता है, जो विभिन्न जगहों पर यत्र-तत्र जमा किया जा रहा है। नगर प्रशासन की उदासीनता के कारण सफाई कर्मी भी यत्र-तत्र कचरा जमा करने के लिए मजबूर है। लेकिन नगर प्रशासन के अब तक कान पर जूं तक नहीं रेंग रहा है ध्यान देने वाली बात यह है कि कचरा प्रबंधन के उचित तरीके से क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर नगर विकास विभाग की ओर से निर्देश दिए जाते रहे हैं। लेकिन नगर परिषद बरगवां अमलाई में कचरा डम्पिंग के लिए कोई निश्चित जगह का चयन नहीं किया जा सका है
खुले में प्लास्टिक बैग या कचरा को फेंके जाने पर उसे मवेशी खाकर बीमार हो रहे है। मवेशी चिकित्सक के अनुसार इस तरह से प्लास्टिक और कचरा खाने से मवेशियों में गंभीर बीमारी हो रही है। नगर परिषद अपने क्षेत्र के घरों से कचरा उठा तो रही है लेकिन कोई सुरक्षित जगह नहीं होने की वजह से इन कचरा को खुले में फेंक देते है। इन कचरों में सबसे ज्यादा हानिकारक प्लास्टिक बैग पॉलिथिन होता है। जबकि सरकारी आदेश के अनुसार प्लास्टिक बैग पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है लेकिन फुटपाथ दुकानदारों के साथ स्थाई दुकानदार भी धरले से प्लास्टिक बैगो का इस्तेमाल कर रहे है। यही प्लास्टिक बैग जब कचरे में जाता है तो मवेशी इसे अपना भोजन बना लेते है। नगर परिषद बरगवां अमलाई के वार्ड क्रमांक 5 में मुक्तिधाम में जहा अग्नि संस्कार किया जाता है वही परिषद द्वारा कचड़ा फेक गंदगी फैलाई जा रही और कचरों को खा पशु बीमारी के शिकार हो रहे पलास्टिक कचरा खाने से दुधारू पशुओं में ज्यादा प्रभाव नजर आता है। मवेशी मालिकों का कहना है कि महंगाई के कारण अपने पशुओं को सही तरह से चारा उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। इस मजबूरी मवेशियों को खुले में छोड़ना पड़ता है। दूसरे मवेशी पालक ने बताया ऐसी ही मेरी दुधारू गाय के साथ हुआ था। जो धीरे-धीरे दूध कम देने लगी, जिसका प्रभाव बछड़े पर भी पड़ने लगा। समझ नहीं पाए कि कौन सा रोग हुआ है लेकिन कुछ दिन बाद बीमार हालत में उसकी मौत हो गई। इसलिए दूसरे मवेशियों को हम बाहर नहीं जाने देते है। दूध सेवन करने वाले भी होते है बीमार
चिकित्सक की माने तो आवारा पशु सड़क किनारे प्लास्टिक को आहार बना लेते है। उनके द्वारा दी हुई दूध का सेवन करने वाला भी बीमार हो जाएगा क्योंकि प्लास्टिक कैंसर को बढ़ावा देता है। जहां एक तरह से पशुओं का सही समय पर इलाज न होने से पशुओं में कैंसर जैसी बीमारी एक बड़ा रूप ले लेती है। वहीं कुछ पशुओ में इस बीमारी का कारण प्लास्टिक बताते है।
फूड प्वाइजनिंग की समस्या सबसे ज्यादा समस्या होती है: पशु चिकित्सको ने बताया कि मवेशियों में फूड प्वाइजनिंग की समस्या सबसे ज्यादा उत्पन्न होती है। इससे मवेशी कमजोर हो जाती है। अगर समय रहते इलाज नहीं कराया गया तो वह मर ही जाती है। सबसे ज्यादा नुकसान मवेशियों को कचरे के साथ प्लास्टिक पॉलिथिन के खाने से होता है। यह प्लास्टिक पेट के आत में फंस जाता है। इससे मवेशी धीरे-धीरे और रोग का शिकार हो जाती है। उनका खाना पीना कम होने लगता है। ग्रामीण इलाकों के ऐसे पशुपालक अपने मवेशियों का इलाज नहीं करा पाते है। जानवरों में कैंसर जैसे रोगों को भी मिल रहा है काफी बढ़ावा: वर्ष 2018 में किए गए सर्वे में पाया गया कि गाय-भैंस के दूध, गोबर और मूत्र में प्लास्टिक के कण पाए जा रहे है। जो इंसान के लिए तो हानिकारक है ही साथ ही जानवरों में कैंसर को भी बढ़ावा दे रहा है। सर्वे में पॉलीथीन से कैंसर होना पाया गया है। ऐसी गायों द्वारा उत्पादित दूध के माध्यम से प्लास्टिक की विषाक्त सामग्री भी मनुष्य में प्रवेश कर सकती है। प्लास्टिक पॉलीथिन में अन्य घर के कचरे के साथ विदेशी धातु जैसे सुइयों, तारों, नाखूनों आदि का भी फेका जाता है।
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